'मुसाफ़िर कैफे' विचार मूल रूप से मशहूर हिंदी लेखक दिव्य प्रकाश दुबे के इसी नाम के उपन्यास से आया है। अपनी सरल लेकिन गहरी कहानी कहने के लिए जाने जाने वाले दुबे यह बताते हैं कि कैसे आधुनिक रिश्तों में हम सब सिर्फ 'मुसाफ़िर' की तरह मिलते हैं—कोई थोड़ी देर के लिए आता है और कोई ज़िंदगी भर का साथी बन जाता है। कहानी को बहुत ही खूबसूरत ढंग से एक कैफे के इर्द-गिर्द बुना गया है, जहां जिंदगियां टकराती और बिखरती हैं, वहीं कई सपने भी पनपते हैं।
: After a series of weekend meetings, the two find themselves in an unplanned live-in relationship, navigating the friction between their personal dreams and the comfort of each other's presence. musafir cafe hindi exclusive